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शनिवार, 5 मई 2018

अगर इस्लाम के नाम पर वोट मांगा तो दे दूंगा इस्तीफा : गुलाम नबी आजाद

नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने ट्रिपल तालाक अध्यादेश को अत्याचारी कानून बताया है।
उन्होंने कहा कि अत्याचारी कानून होने की वजह से यह बिल राज्यसभा में पास नहीं हो पाया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने कहा, यह अध्यादेश सिर्फ पति और पत्नी को अलग करता है, इसके अलावा कुछ भी नहीं है. हम इसे पूरी तरह अस्वीकार करते हैं क्योंकि यह एक अत्याचारी कानून है।
उन्होंने कर्नाटक चुनाव में इस्लाम के नाम पर वोट मांगने की बात को सिरे से खारिज किया. उन्होंने कहा, ‘मैने विशेष रुप से मुसलमानों के लिए कोई सार्वजनिक बैठक नहीं की थी, यह सिर्फ एक जनसभा थी. मैं चुनौती देता हूं कि अगर चुनाव आयोग से मिलने वाले किसी भी व्यक्ति के पास इस्लाम के नाम पर वोट मांगने का मेरा वीडियो या ऑडियो है तो मैं संसद के सदस्य और विपक्ष के नेता के रुप में इस्तीफा दे दूंगा.

शुक्रवार, 4 मई 2018

लोगों तक बिजली पहुंचाने के लिए शानदार काम कर रहा है भारतः World Bank

नई दिल्ली : देश के हर गांव तक बिजली पहुंचाने पर विश्व बैंक ने मोदी सरकार की प्रशंसा की है।
विश्व बैंक ने कहा है कि भारत ने इलेक्ट्रिफिकेशन क्षेत्र में ‘बहुत अच्छा’ काम किया है और देश की 80 फीसदी आबादी तक बिजली पहुंचाई गई है। विश्व बैंक की इस सप्ताह जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2010 से 2016 के बीच भारत ने हर साल तीन करोड़ लोगों को बिजली उपलब्ध कराई है।


15 फीसदी लोग बिजली से दूर
विश्व बैंक की लीड एनर्जी इकॉनमिस्ट विवियन फोस्टर ने कहा कि भारत की 15 फीसदी जनसंख्या अब भी बिजली के पहुंच से दूर है। उन्होंने कहा पूरी दुनिया के इलेक्ट्रिफिकेशन के 2030 के लक्ष्य तक भारत शेष आबादी तक भी बिजली पहुंचाने में कामयाब रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह आंकड़ा भारत सरकार के दावे से अधिक है।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बांग्लादेश और केन्या में इलेक्ट्रिफिकेशन की गति भारत के मुकाबले अधिक है।

गरीब परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन
यह रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भारत के सभी गांवों तक बिजली पहुंचने के दावे के एक हफ्ते बाद आई है। सौभाग्य योजना के तहत सभी गरीब परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन दिया जा रहा है। सरकार का कहना है कि दिसंबर 2018 तक देश के सभी घरों में बिजली होगी।

क्‍या अब भारत बनेगा हिंदू राष्‍ट्र? इस राज्‍य से हुई शुरूआत, दूसरे धर्म के लोग हुए बैन।

नई दिल्‍ली। देश को हिंदू राष्‍ट्र रूप में देखने की चाह आज देश के कई लोगों में है।
लेकिन यह काम इतना आसान नहीं है। वहीं दूसरी तरफ, भले ही पूरे देश को हिंदू राष्‍ट्र बनाना आसान न हो लेकिन एक गांव को हिंदू गांव जरूर बनाया जा सकता है। जी हां, ऐसा ही कुछ आंध्र प्रदेश के एक गांव में हुआ है।
आंध्र प्रदेश में एक गांव को हिंदू गांव घोषित कर दिया गया है। यही नहीं, बकायदा यहां पर अन्‍य धर्म के लोगों की एंट्री को भी बैन कर दिया गया है। बैन की चेतावनी, गांव के बाहर एक बोर्ड लगाकर लिखी गई है।
मामला आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले के मईदुकर मंडल के गांव केसालिंगायापल्ली का है। इस गांव में 250 परिवार रहते हैं, जो सभी हिंदू हैं। यही वजह है कि गांव के लोगों ने सभी की सहमति से इस गांव को हिंदू गांव घोषित कर दिया गया है और गांव को जाने वाली सड़क के दोनों ओर भगवा झंडे लगा दिए हैं।
वहीं गांव के बाहर एक बोर्ड लगाया गया है। इस पर लिखा है कि इस गांव में सभी लोग हिंदू हैं, इसलिए दूसरे धर्मों के लोग यहां अपने धर्म का प्रचार नहीं कर सकते हैं। यदि कोई इसका उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कारवाई की जाएगी। इस बोर्ड के नीचे यह भी लिखा है कि अगर आप अपना धर्म बदलते हो, तो यह अपनी मां बदलने के जैसा है।
आपको बता दें कि इस गांव में दूसरे धर्मों के लोगों के प्रवेश पर पाबंदी दो साल पहले ही यानि कि 2016 में लगायी गई थी, लेकिन इस पर लोगों का ध्यान अब गया है। गांव के लोगों का कहना है कि पिछले कुछ सालों से ईसाई हमारे गांवों में आते हैं और हमारे लोगों को पैसे और दवाई का लालच देकर उन्हें धर्मांतरण के लिए प्रेरित करते हैं। जबकि हम हिंदू ऐसा कभी नहीं करते।
स्‍थानीय लोगों के मुताबिक, वो लोग हमारे लोगों का ब्रेनवॉश करते हैं। इस पर रोक लगाने के लिए हमने फैसला किया कि इसपर रोक लगाने के लिए दूसरे धर्म के लोगों की गांव की एंट्री पर बैन करने का फैसला किया। गांव के लोगों ने सफाई देते हुए कहा कि दूसरे धर्म के लोग गांव आ सकते हैं, लेकिन उन्हें अपने धर्म का प्रचार करने की अनुमति नहीं है।
गांव के लोगों का कहना है कि यह कदम उन्होंने आरएसएस, बजरंग दल और विहिप के लोगों के कहने पर नहीं उठाया है, बल्कि यह उनका खुद का फैसला है।

सोमवार, 16 अप्रैल 2018

अभी-अभी : दंगा कर रहे दलितों को सुप्रीम कोर्ट का एक और झटका, कहा- जाओ अभी नहीं करेंगे सुनवाई।

New Delhi : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (2 अप्रैल) को एससी/ एसटी अधिनियम में संरक्षण के उपायों के फैसले पर रोक लगाने और इस पर पुनर्विचार की एक याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार किया है। करीब 150 समूहों से मिलकर बने एससी/एसटी संगठनों के अखिल भारतीय संघ ने आज (सोमवार, 2 अप्रैल) बड़े पैमाने पर हुई हिंसा का संदर्भ देते हुए अविलंब सुनवाई की मांग की। एससी/एसटी संगठनों द्वारा अविलंब सुनवाई की मांग अस्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले पर सुनवाई उचित समय पर होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च के अपने फैसले में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के कुछ प्रावधानों को नरम बनाया था, ताकि अपना कर्तव्य निभा रहे ईमानदार अधिकारियों को कानून के तहत झूठे मुकदमों में फंसा कर ब्लैकमेल किये जाने से रोका जा सके। फैसले की दलितों और विपक्ष ने कटु आलोचना की है। उनका कहना है कि कानून को कमजोर करने से दलितों के खिलाफ भेदभाव और अपराध बढ़ जाएंगे।
वहीं दूसरी ओर अनुसूचित जाति/जनजाति (एससी/एसटी) अत्याचार रोकथाम अधिनियम को कमजोर करने को लेकर आपत्ति जताते हुए विभिन्न दलित संगठनों के कार्यकर्ताओं ने पंजाब व हरियाणा में विरोध प्रदर्शन किया। तलवारें, लाठियां, बेसबॉल बैट व झंडे लिए सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने जालंधर, अमृतसर व बठिंडा में दुकानों व अन्य प्रतिष्ठानों को जबर्दस्ती बंद करा दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने सोमवार (2 अप्रैल) सुबह अमृतसर जिले में एक ट्रेन को रोकने की कोशिश की, लेकिन रेलवे अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद उन्होंने ट्रेन को जाने दिया।

कानून को कमजोर बनाये जाने के विरोध में कड़ी सुरक्षा के बीच दलितों ने पंजाब के जालंधर, होशियारपुर, रोपड़, बठिंडा, अमृतसर और फिरोजपुर में प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन के अंदर भी दाखिल हो गए। उन्होंने ट्रैक पर पुतले भी जलाए। कुछ राजमार्गो व सड़कों को भी जाम कर दिया गया है, जिसके कारण चंडीगढ़ व आसपास के इलाकों में आवागमन गंभीर रूप से प्रभावित हुआ।

अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) अधिनियम पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के विरोध में सोमवार (2 अप्रैल) को आहूत भारत बंद का असर राज्य के कई हिस्सों में देखने को मिला है। पूर्वांचल के आजमगढ़ जिले और पश्चिमी उप्र में कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने बसों में आगजनी व तोड़फोड़ की। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठियां भांजनी पड़ी। एससी-एसटी अधिनियम में परिवर्तन के विरोध में सोमवार (2 अप्रैल) को आजमगढ़ में प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए। इस दौरान जिले के सगड़ी तहसील परिसर के बाहर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया। वहीं, अजमतगढ़ में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सड़क पर उतर कर दुकानें बंद कराई और सड़कों पर जाम लगा दिया।

'संविधान से छेड़छाड़ नहीं चलेगी' के नारे :
आजमगढ़ के अजमतगढ़ में बड़ी संख्या में दलित समुदाय के लोगों ने सोमवार सुबह 10 बजे जुलूस निकाला और बाजार बंद कराने लगे। प्रदर्शनकारियों ने यहां तोड़फोड़ भी की। भीम आर्मी और भारत मुक्ति मोर्चा के 2000 से अधिक सदस्य 'संविधान से छेड़छाड़ नहीं चलेगी, नहीं चलेगी' के नारे लगा रहे थे। इन लोगों ने मुख्य मार्ग पर नारेबाजी करते हुए जाम लगा दिया। पुलिस ने उन्हें हटाना शुरू किया तो विरोध में प्रदर्शनकारियों ने पथराव शुरू कर दिया। पुलिस ने बल प्रयोग कर प्रदर्शनकारियों को शांत कराया।
मेरठ में पुलिस पर हमला :
पश्चिमी उप्र में मेरठ शहर के कंकरखेड़ा क्षेत्र में सैकड़ों युवक हाथों में लाठी-डंडे और हथियार लेकर प्रदर्शन करते हुए सड़क पर उतर आए और उन्होंने जमकर बवाल मचाया। इस दौरान कुछ उग्र प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर हमला कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से नाराज दलित विद्यार्थियों ने मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया। विद्यार्थियों ने परिसर में तोड़फोड़ की। दलितों ने तेजगढ़ी चौराहे पर कब्जा कर चक्का जाम कर दिया। इसके साथ ही कई जगहों पर बसों को भी जलाने की खबर है। पुलिस ने लोगों को दिल्ली से देहरादून की ओर न जाने की सलाह दी है।

बुधवार, 14 फ़रवरी 2018

PM मोदी का एक और तोहफा: जिसके पास नहीं है ड्राइविंग लाइसेंस उन्हें आज खुश कर देगी ये ख़बर

सचिन यादव : (संवाददाता) : नई दिल्ली :  अगर आपके पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है तो ये खबर आपके लिए तोहफे से कम नहीं है।
मोदी सरकार धीरे-धीरे मिडिलमेन यानि दलालों को ख़त्म करते जा रही है। इस बार मोदी सरकार ने आम जानते के हित में एक और नया फैसला लिया लिया है। अब ड्राइविंग लाइसेंस को घर बैठे अप्लाई करने से लेकर फीस जमा करने तक का आसन रास्ता मुहिया करवाया है।
अब आप आसानी से ऑनलाइन ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अप्लाई कर सकते हैं. राज्य सरकारों और केंद्र सरकार की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने का विकल्प है। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की सर्विस ऑनलाइन होने से आप बिना किसी एजेंट की मदद के बनवा सकते हैं।

उम्र का प्रूफ : गौरतलब है कि उम्र के लिए इनमें से कोई एक डॉक्युमेंट होना जरूरी है। आपको अपॉइन्टमेंट के समय ऑरिजनल डॉक्युमेंट ले जाने होंगे। साथ ही इनके सेल्फ अटेस्टेड कॉपी भी साथ लेकर जानी होगी। वोटर आईडी कार्ड, स्कूल सर्टिफिकेट, एलआईसी पॉलिसी, पासपोर्ट – बर्थ सर्टिफिकेट।
एड्रेस प्रूफ के लिए चाहिए होंगे ये डॉक्युमेंट : आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एड्रेस प्रूफ के लिए इनमें से कोई एक डॉक्युमेंट होना जरूरी है. आपको अपॉइन्टमेंट के समय ऑरिजनल डॉक्युमेंट ले जाने होंगे. साथ ही इनके सेल्फ अटेस्टेड कॉपी भी साथ लेकर जानी होगी. वोटर आईडी, पासपोर्ट, सरकारी पे स्लिप, पेन्शन पास बुक, ऑर्म्स लाइसेंस
फीस : लर्निंग लाइसेंस की फीस – 200 रुपए परमानेंट लाइसेंस की फीस – 200 रुपए ड्राइविंग लाइसेंस रिन्युअल की फीस – 200 रुपए इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस की फीस – 1,000 रुपए

शनिवार, 10 फ़रवरी 2018

यूं ही नहीं कहते डॉक्टर को भगवान, अपने पैसों से दी मरीज को नई जिंदगी।

गुरुग्राम [जेएनएन]। डॉक्टरों को भगवान का दूसरा रूप भी कहा गया है। जिंदगी बचाने वाले डॉक्टर कई बार कुछ ऐसा कर जाते हैं जो समाज में एक मिसाल बन जाती है। वैसे जिला नागरिक अस्पताल के डॉक्टरों की लापरवाही आए दिन खबरें चर्चा में बनी रहती हैं। लेकिन यहां एक ऐसे डॉक्टर भी हैं जो मरीज के जीवन की अहमियत समझते हुए अपनी जेब से पैसा खर्च कर नया जीवन देने का काम करते हैं। पैसा तो बहुत आ जाएगा गुरुग्राम के जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में कार्यरत डॉ. योगेंद्र सिंह ने पैसे से ज्यादा एक ऐसे मरीज के जीवन को तवज्जो दी जिसे वह पहले से जानते तक नहीं थे। डॉ. योगेंद्र का कहना है कि पैसा तो बहुत आ जाएगा। लेकिन मरीज को एक दिन बाद ठीक नहीं किया जा सकता था लिहाजा उन्होंने उसकी मदद करने का फैसला किया।