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शनिवार, 21 अप्रैल 2018

बड़ी खबर : दुनिया के सबसे ताकतवर देशों में शामिल हुआ भारत।

नमस्कार दोस्तों ! TODAY JAGRAN न्यूज़ में आपका स्वागत है।
 दोस्तों हाल ही में भारत को ऑस्ट्रेलिया ग्रुप की सदस्यता मिल गयी है. आपको बता दें कि यह ग्रुप केमिकल और बायलॉजिकल एजेंट्स के निर्यात पर अपने नियंत्रण के जरिए सुनिश्चित करता है कि इससे रासायनिक या जैविक हथियार न बन सके।

परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में शामिल होने के लिए पिछले काफी वक़्त से कोशिश में लगे भारत के लिए ये बड़ी सफलता के रूप में देखी जा रही है. इस उपलब्धि से अप्रसार में भारत की दुनिया में हैसियत बढ़ेगी ओर साथ ही न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (NSG) में सदस्यता के लिए भी भारत की दावेदारी और भी ज्यादा मजबूत होगी, जिसमें चीन पिछले काफी वक़्त से अड़ंगा लगा रहा है।अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस के साथ भारत भी सीना तान के खड़ा होगा अब
आपको बता दें कि ऑस्ट्रेलिया ग्रुप एक अनौपचारिक संगठन है, जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश पहले से शामिल हैं. पीएम मोदी की दोस्ती के चलते अमेरिका और फ्रांस काफी वक़्त से भारत को इस ग्रुप का मेंबर बनाने की वकालत करते आये है. और अब भारत को इस ग्रुप की सदस्यता मिल गयी है.
दरअसल भारत सैन्य इस्तेमाल के लिए सबसे ज्यादा केमिकल सबंधी सामानों का ही आयात करता है, मगर ये कोई खतरे की बात नहीं क्योंकि भारत में इस पर नजर रखने की काफी अच्छी व्यवस्था है. अब ग्रुप में सदस्यता मिलने से भारत को केमिकल और बायलॉजिकल एजेंट्स के वैश्विक कारोबार में दखल का मौका मिलेगा. इस उपलब्धि के बाद भारत में फ्रांस के राजदूत अलेक्जेंडर जेगलर ने शुक्रवार को भारत को बधाई दी और इसे नरेंद्र मोदी की कूटनीति की जीत बताया. यहाँ एक बात आपको और बता दें कि पिछले ही साल दिसंबर में पीएम मोदी के प्रयासों से भारत वासेनार अरेंजमेंट का मेंबर बना था.
भारत बनता जा रहा वैश्विक महाशक्ति
इस अरेंजमेंट का मकसद पारंपरिक हथियारों के साथ उन वस्तुओं और तकनीकों के प्रसार में पारदर्शिता और जिम्मेदारी लाना है, जिनका सैन्य इस्तेमाल हो सकता है. इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों के ही कारण 2016 के जून में भारत मिसाइल टेक्नॉलजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) का मेंबर भी बना था, जो मिसाइल, यूएवी और संबंधित तकनीक के प्रसार पर नजर रखता है. इसका मेंबर बनने से भारत को उच्च मिसाइल तकनीक हासिल करने का रास्ता साफ हुआ था. जानकारों के मुताबिक़ अब वो दिन दूर नहीं जब भारत एनएसजी का सदस्य भी बनने जा रहा है.

कठुआ मामले में आया नया मोड़, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया अपना फैसला।

दोस्तों,आपका हमारे TODAY JAGRAN न्यूज़ पोर्टल में स्वागत है। आज हम आपको कठुआ कांड से संबंधी कुछ तथ्यों के बारे में बताने जा रहे हैं क्योंकि इन दिनों ये बहुत ही चर्चा में है।


कश्मीर की 8 साल की बच्ची, जिसके साथ कई सारे लोगों ने मंदिर के अंदर मिलकर दुष्कर्म किया, और आखिर में उस 8 साल की बच्ची के सिर पर ईट, पत्थर से मारकर उसकी हत्या कर दी गयी। एक तरफ जहां पूरा बॉलीवुड आसिफा बनो का सपोर्ट कर रहा है दूसरी तरफ कुछ और ही चल रहा है। इसी सापेक्ष में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी कि इस केस की जांच सीबीआई के द्वारा की जाए परंतु सुप्रीम कोर्ट ने यह केस क्राइम ब्रांच को सौंपा दिया है और उन्हीं से पूरी जांच कराई जाएगी।

भारत में बहुत से राजनेता इस मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं परंतु युवा इस मामले की तह तक जाना चाहते हैं और लोगों का पर्दाफाश करना चाहते हैं।
दोस्तो ,आप क्या सोचते हैं इस केस के बारे में, क्या भारत में आसिफ को न्याय मिलेगा या नही ? आप हमें कमेंट कर जरूर बताएं हम इस तरह के रोचक न्यूज़ जानने के लिए हम से जुड़े रहें साथ ही साथ हमें फॉलो करना ना भूलें।

अब जामा मस्जिद से मुस्लिम धर्मगुरुओं ने किया बड़ा ऐलान?

शामली:मुस्लिम उलेमाओं ने एक राय होकर के एक ऐसा अनोखा फरमान जारी किया है, जिसे सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे।
उलेमाओं ने फरमान सुनाया है कि अगर मुस्लिम शादी में डीजे और ढोल-नगाड़े बजे तो उस शादी का वे बायकॉट कर देंगे और मुस्लिम उलेमा निकाह भी नहीं पढ़ाएंगे।

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शामली शहर की मुख्य जामा मस्जिद में जनपद शामली के मुस्लिम उलेमाओं की एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में कई मुस्लिम धर्मगुरु शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना शौकीन ने की। बैठक के दौरान शादी में फिजूल के खर्च कर रहे मुस्लिम लोगों पर पाबंदी लगाने की बात की गई। मुस्लिम उलेमाओं का मानना है कि विवाह-शादी के दौरान डीजे और ढोल-नगाड़े, आतिशबाजी बंद कराई जाए। क्योंकि इस तरह के फिजूल के खर्च करने के बजाय किसी गरीब की मदद की जाए। उलेमाओं ने कहा कि पहले तो वह इस तरह की शादी करने के लिए मुस्लिम धर्म के लोगों को समझाएंगे और अगर कोई उनकी बात नहीं मानता तो उनका बहिष्कार किया जाएगा।
उलेमाओं ने कहा कि शादियों में डीजे, ढोल-नगाड़े, आतिशबाजी हमारे धर्म के खिलाफ है। इसिलए अब ऐसा बिल्कुल नहीं होने दिया जाएगा। बैठक में निर्णय लिया गया कि अगर किसी भी मुस्लिम शादी में डीजे और ढोल-नगाड़े या आतिशबाजी हुई तो उलेमा उस शादी में निकाह नहीं पढ़ाएंगे। बैठक में जमीयत ए उलेमा हिंद के जनरल सेक्रेटरी मौलाना अयूब सहित कई उलेमा मौजूद रहे।

बिहार में अब कोई भी दलित नहीं है. लेकिन यह कैसे हुआ?

बिहार : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बीते शनिवार को राज्य में पांच फीसदी की हिस्सेदारी रखने वाली पासवान यानी दुसाध जाति को महादलित का दर्जा देने का ऐलान किया
उनके इस ऐलान के साथ ही बिहार के साथ एक दिलचस्प तथ्य जुड़ गया है. राज्य में अब कोई भी जाति दलित नहीं रह गई है. बिहार की सभी 22 दलित जातियां महादलित बन गई हैं.
हालांकि नीतीश कुमार के इस कदम को आलोचक राजनीतिक लाभ के लिए उठाया गया कदम करार दे रहे हैं. उनके अनुसार पिछले तीन साल में पासवान जाति की सामाजिक-आर्थिक दशा खराब होने के कहीं से कोई संकेत नहीं मिले हैं जिससे कि महादलित का रद्द किया गया उसका दावा फिर से बहाल किया जा सके.
इससे पहले नीतीश कुमार ने ही मार्च 2015 में पासवान जाति को महादलित का दर्जा देने वाला जीतन राम मांझी का आदेश पलट दिया था. उस समय उनका तर्क था कि दलितों में 31 फीसदी का हिस्सा रखने वाली इस जाति की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति बाकी दलितों से बेहतर है. उन्होंने तब यह भी बताया था कि महादलित का दर्जा उसी दलित बिरादरी को दिया गया है जिनकी दशा दूसरों से खराब है. असल में नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री बने जीतन राम मांझी ने उनसे बगावत के बाद फरवरी 2015 में महादलित वर्ग से बाहर रह गई एकमात्र दलित जाति पासवान को इसमें शामिल करने की घोषणा की थी.
इसलिए बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस फैसले को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री की नीयत पर सवाल उठाया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि नीतीश कुमार कभी नहीं चाहते कि रामविलास पासवान या कोई और उनसे ज्यादा मजबूत हों इसलिए यह फैसला उन्होंने केवल अपनी भलाई के लिए लिया है. तेजस्वी यादव ने कहा, ‘जब मैं उपमुख्यमंत्री था तो चंपारण के एक कार्यक्रम में शामिल होने नीतीश जी के साथ गया था. इस दौरान हेलीकॉप्टर में दलित-महादलित का मुद्दा छिड़ने पर नीतीश जी ने मुझसे कहा कि पासवान जी दलित नेता बनने की कोशिश कर रहे थे और तब उन्हें केवल उनकी जाति तक सीमित रखने के लिए उन्होंने महादलित वर्ग का गठन किया था.’ तेजस्वी यादव ने इसलिए नीतीश कुमार से पूछा है कि आखिर क्यों उन्होंने पासवान जाति को अब तक महादलित वर्ग से बाहर रखा और अब उसे इसमें शामिल कर लिया है.
वहीं राजनीतिक विश्लेषक नीतीश कुमार के ताजा फैसले को केंद्र में सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के भीतर चल रहे राजनीतिक दांव-पेंच का परिणाम मान रहे हैं. इनके अनुसार एनडीए में शामिल बिहार के तीनों घटक आपसी सहयोग बढ़ाकर भाजपा पर दबाव बनाना चाहते हैं ताकि अगले लोकसभा चुनाव में अधिक से अधिक सीटों पर दावेदारी ठोकी जा सके. आलोचक नीतीश कुमार के इस फैसले को इसी मकसद से उठाया गया कदम मान रहे हैं जिससे कि लोक जनशक्ति पार्टी के मुखिया रामविलास पासवान से उनके संबंध और मजबूत हो सके. जानकारों का दावा है कि पिछले कई सालों से दोनों नेताओं के संबंध अच्छे नहीं रहे हैं लेकिन भाजपा के बढ़ते हुए प्रभाव पर अंकुश लगाने के लिए दोनों नेता पिछले कुछ हफ्तों में कई बार मिल चुके हैं.
नीतीश कुमार इसके अलावा कोइरी जाति के नेता और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा के साथ भी नजदीकियां बढ़ाने में जुटे हैं. इसके तहत वे हाल में कई बार उनके साथ मंच साझा कर चुके हैं. बिहार के मुख्यमंत्री को कुछ समय पहले तक कुर्मी और कोइरी दोनों जातियों का नेता माना जाता था, लेकिन कुशवाहा के उभार के बाद ऐसा नहीं रह गया है. हालांकि जानकारों के अनुसार यदि दोनों नेताओं के संबंध सुधरते हैं तो इसका फायदा दोनों को मिलेगा.
इस बीच इन दलों ने हाल में दावा किया है कि उनके पास राज्य के कम से कम 38 फीसदी वोटर हैं. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार एनडीए में शामिल इन तीनों दलों की नजर गैर-यादव ओबीसी, अति पिछड़ी और दलित जातियों पर है. इसलिए माना जा रहा है कि नीतीश कुमार अगले कुछ महीनों में इन जातियों को गोलबंद करने वाले ऐसे ही कई दूसरे फैसले भी ले सकते हैं. यही नहीं, इस बात की पूरी संभावना है कि ये तीनों नेता आने वाले वक्त में एक-दूसरे के और करीब दिखने की पूरी कोशिश करें. आखिर भाजपा के साथ रहते हुए भी अपना-अपना अस्तित्व बचाना इन तीनों के लिए आसान चुनौती नहीं है.

शुक्रवार, 20 अप्रैल 2018

झारखंड निकाय चुनावः 34 में से 21 निकायों में जीती भाजपा, जानें-कौन कहां से जीता?

रांची : जेएनएन : झारखंड के निकाय चुनाव में भाजपा और उसके सहयोगी आजसू का परचम लहराया है। 
34 निकायों में भाजपा और आजसू को 23 सीटों पर जीत मिली है। अकेले भाजपा ने 21 निकायों पर कब्‍जा जमाया है। इनमे पांचों नगर निगम की सीटें भी शामिल हैं। कांग्रेस ने पांच, झामुमो ने तीन सीटें जीती हैं। निर्दलीय प्रत्‍याशी ने दो सीटें जीतीं हैं। झाविमो और राजद के खाते में एक-एक सीट है। उधर, झुमरीतिलैया उपचुनाव में अध्यक्ष पद पर भाजपा की जीत हुई है।
पांचों निगमों पर भाजपा की जीत
रांची: मेयर पद पर भाजपा की आशा लकड़ा झामुमो की वर्षा गाड़ी से जीतीं। डिप्‍टी मेयर पद पर भाजपा के संजीव विजयवर्गीय जीते।
मेदिनीनगर : मेयर पद पर भाजपा प्रत्‍याशी अरुणा शंकर निर्दलीय पूनम देवी से जीते।
गिरिडीह: भाजपा के मेयर पद के प्रत्‍याशी सुनील पासवान जीते। डिप्‍टी मेयर पर भाजपा के प्रकाश राम का कब्‍जा।
आदित्‍यपुर: मेयर पद पर भाजपा के बिनोद श्रीवास्‍तव जीते। भाजपा के अमित सिंह डिप्‍टी मेयर पद पर जीते।
हजारीबाग : मेयर पद पर भाजपा प्रत्‍याशी रोशनी तिर्की 7500 मतों से जीतीं। डिप्टी मेयर पद पर भाजपा के राजकुमार लाल 6500 मतों से जीते।
जानें, कौन कहां से जीता
लातेहार नगर पंचायत : अध्‍यक्ष पद पर भाजपा प्रत्‍याशी सीतामणि तिर्की जीतीं
चिरकुंडा नगर परिषद : अध्‍यक्ष पद पर भाजपा प्रत्‍याशी डब्‍ल्‍यू बाउरी ने कांग्रेस प्रत्‍याशी मुरली पुरी को 1500 से ज्‍यादा मतों से हराया। उपाध्‍यक्ष पद भी भाजपा की झोली में।
पाकुड़ नगर परिषद : अध्यक्ष-उपाध्यक्ष दोनों पद भाजपा की झोली में। अध्यक्ष पद पर संपा साह को लगभग 2900 वोटों से जीत मिली। उपाध्यक्ष पद पर सुनील सिन्हा लगभग 2500 वोटों से जीत गए।
चतरा नगर परिषद : भाजपा की गुंजा देवी 900 से अधिक वोट से झाविमो उम्‍मीदवार से जीतीं
खूंटी नगर पंचायत : अध्‍यक्ष पद पर भाजपा के अर्जुन पाहन जीते। उपाध्‍यक्ष पद भी भाजपा की झोली में।
चाकुलिया नगर पंचायत : भाजपा की संध्‍या रानी सरदाद जीतीं, उपाध्‍यक्ष पद पर भी बढ़त
जामताड़ा नगर पंचायत : अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पदों पर भाजपा को जीत मिली है। अध्यक्ष रीना कुमारी बनेंगी तो उपाध्यक्ष पद पर चंडीशरण दे जीते हैं।
मिहिजाम नगर परिषद : अध्यक्ष पद पर भाजपा प्रत्याशी कमल गुप्ता और उपाध्यक्ष पद पर कांग्रेस प्रत्याशी शांति देवी को जीत मिली है।
नगर उंटारी नगर पंचायत : भाजपा की विजया लक्ष्‍मी देवी 2458 मतों से जीतीं। बसपा की किरण दूसरे नंबर पर रहीं।
गढ़वा नगर परिषद : भाजपा प्रत्‍याशी पिंकी केशरी 193 वोट से जीतीं। झामुमो के प्रत्‍याशी दूसरे नंबर पर रहे।
बुंडू नगर पंचायत : अध्‍यक्ष पद पर भाजपा के राजेश उरांव आगे। उपाध्‍यक्ष पद आजसू के सुनील जायसवाल आगे।
बासुकीनाथ नगर पंचायत : अध्यक्ष पद पर भाजपा की पूनम देवी को जीत मिली है, जबकि उपाध्यक्ष पद कांग्रेस प्रत्याशी अमित कुमार की झोली में गया।
साहिबगंज नगर परिषद : भाजपा प्रत्याशी श्रीनिवास यादव को अध्यक्ष पद पद पर जीत मिली है, जबकि उपाध्यक्ष पद पर झाविमो प्रत्याशी रामानंद साह जीते।
बरहरवा नगर पंचायत : भाजपा प्रत्याशी श्यामलदास अध्यक्ष पद से और भाजपा प्रत्याशी लोकेश कुशवाहा उपाध्यक्ष पद पर विजय हुए।
सरायकेला नगर परिषद : अध्‍यक्ष पद पर भाजपा की मीनाक्षी पटनायक जीतीं। उपाध्‍यक्ष पद पर झामुमो प्रत्‍याशी को मिले जीत।
डोमचांच नगर पंचायत : आजसू के राजकुमार मेहता जीते, उपाध्‍यक्ष पद पर राजद के पप्‍पू मेहता जीते।
रामगढ़ नगर परिषद : आजसू के योगेश बेदिया अध्‍यक्ष पद का चुनाव जीते। कांग्रेस के दिनेश मुंडा को 5037 वोटों से हराया।
लोहरदगा नगर परिषद : अध्‍यक्ष पद पर कांग्रेस की अनुपमा भगत ने भाजपा की मनोरमा एक्‍का को हराया।
फुसरो नगर परिषद : कांग्रेस ने अध्‍यक्ष और उपाध्‍यक्ष दोनों पदों पर जीत हासिल की।
सिमडेगा नगर परिषद : अध्‍यक्ष पद पर कांग्रेस प्रत्‍याशी पुष्‍पा कुल्‍लू से जीतीं। उपाध्‍यक्ष पद पर भाजपा उम्‍मीदवार ओमप्रकाश साहू जीते।
गुमला नगर परिषद : अध्‍यक्ष पद पर कांग्रेस के दीप नारायण उरांव और उपाध्‍यक्ष पद झामुमो के कलीम जीते।
कपाली नगर परिषद : अध्‍यक्ष पद पर कांग्रेस प्रत्‍याशी की जीत। उपाध्‍यक्ष पद पर चुनाव रद हो गया है।
चाईबासा नगर परिषद : अध्‍यक्ष और उपाध्‍यक्ष पद पर झामुमो का कब्‍जा।
मधुपुर नगर परिषद : अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद पर झामुमो ने कब्जा जमाया है। अध्यक्ष पद पर झामुमो प्रत्याशी सेवानिवृत्त शिक्षिका लतिका मुर्मू ने 1347 वोट से जीत दर्ज कराई। दूसरे स्थान पर बीजेपी, जेएमएम को 10,159, बीजेपी को 8812 उपाध्यक्ष पद पर झामुमो प्रत्याशी जियाउल हक उर्फ टार्जन को जीत मिली है।
राजमहल नगर पंचायत : झामुमो प्रत्याशी केताउद्दीन शेख अध्यक्ष पद पर विजयी रहे। वहीं उपाध्यक्ष पद पर भाजपा प्रत्याशी पार्थ दत्ता जीते।
छतरपुर नगर पंचायत : अध्‍यक्ष और उपाध्‍यक्ष झारखंड विकास मोर्चा के नाम।
हुसैनाबाद नगर पंचायत : अध्‍यक्ष और उपाध्‍यक्ष दोनों पदों पर राजद ने जमाया कब्‍जा।
गोड्डा नगर परिषद : निर्दलीय प्रत्याशी जितेंद्र कुमार उर्फ गुड्डू मंडल ने अध्‍यक्ष पद पर भाजपा के अजीत सिंह को हराया। उपाध्‍यक्ष पद पर झाविमो की वेणु जीतीं।
दुमका नगर परिषद : अध्यक्ष पद पर निर्दलीय प्रत्याशी श्वेता झा और उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय विनोद लाल 1697 मतों से विजयी रहे।
लोहरदगा में अध्यक्ष पद पर जीत का जश्न मनाती कांग्रेस की अनुपमा भगत।
34 निकायों में 16 को पड़े थे वोट
34 शहरी निकायों के लिए 16 अप्रैल को वोट पड़े थे। महापौर/अध्यक्ष तथा उप महापौर/उपाध्यक्ष के क्रमश: 34 तथा 33, जबकि वार्ड पार्षद के 749 पदों में से 724 के लिए हुए चुनाव के नतीजे आे हैं। शेष 25 वार्ड पार्षदों का चुनाव पहले ही निर्विरोध हो चुका है। ईवीएम में कैद कुल 4,553 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला सामने आयाहै। इनमें से महापौर/अध्यक्ष पद के लिए 278, उप महापौर/उपाध्यक्ष के लिए 314 तथा वार्ड पार्षद पद के लिए 3961 प्रत्याशी शामिल हैं। इनमें से 2066 महिला प्रत्याशी हैं। कपाली में उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव रद कर दिया है। झामुमो प्रत्याशी के चुनाव चिह्न में गड़बड़ी की शिकायत पर राज्य चुनाव आयोग ने इस संबंध में निर्णय लिया था।
आजसू की जीत पर रामगढ़ के दुलमी में जश्न मनाते कार्यकर्ता।


 65.52 फीसद हुआ मतदान
2013 की तुलना में इस बार 2.35 फीसद मत अधिक पड़े थे। 2013 में जहां 63.17 फीसद मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया था, वहीं इस चुनाव में 65.52 फीसद मतदान हुआ।

कर्नाटक: भाजपा ने जारी की उम्मीदवारों की तीसरी लिस्ट, सिद्धारमैया के खिलाफ उतारा कमजोर प्रत्याशी।

बेंगलुरु: कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी केंद्र की सत्तारूढ़ भाजपा ने उम्मीदवारों की तीसरी लिस्ट जारी करते हुए 59 प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की है।
इसके अलावा भाजपा ने कोलार गोल्ड सीट के पूर्व में घोषित उम्मीदवार को बदल दिया गया है। पार्टी द्वारा घोषित किये गए 59 उम्मीदवारों के नाम में वह सीट भी शामिल है जिससे कांग्रेस के मुख्यमंत्री प्रत्याशी सिद्धारमैया चुनाव लड़ रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस सीट से भाजपा ने कमजोर प्रत्याशी को मैदान में उतारा है।

224 विधानसभा सीटों के लिए इसके पहले भाजपा ने 154 उम्मीदवारों की सूची जारी की थी। अब तक जारी 3 सूचियों के आधार पर पार्टी अब तक 213 उम्मीदवारों की सूची जारी कर चुकी है। अब 11 उम्मीदवारों का ऐलान किया जाना है।
जिन अन्य सीटों पर उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया जाना है, उसमें वरुणा सीट भी शामिल है। इस सीट से माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा के बेटे बीवाई रघुवेंद्र चुनाव मैदान में उतर सकते हैं।
वहीं भाजपा ने मैसूर के चामुंडेश्वरी सीट से गोपाल राव को अपना उम्मीदवार बनाया है। यह वही सीट है जिससे कांग्रेस के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया चुनाव लड़ रहे हैं। कहा जा रहा है कि भाजपा ने इस सीट से मुख्यमंत्री के खिलाफ कमजोर प्रत्याशी खड़ा किया है।
गोपाल राव एक ब्राह्मण हैं जबकि चामुंडेश्वरी सीट का इतिहास रहा है कि यहां से वोक्कालिगा या कुर्बा जाति का उम्मीदवार विजयी होता रहा है। इस सीट पर वोक्कालिगा या कुर्बा जाति की बहुलता है, जबकि ब्राह्मणों की संख्या बेहद कम है। 2013 में जेडीएस ने 42.9 फीसदी जबकि कांग्रेस ने 38.9 फीसदी वोट हासिल किया था।
बता दें, कर्नाटक की 224 सीटों पर विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। कर्नाटक में 244 सीटों के लिए 12 मई को मतदान होगा, जबकि चुनावों का परिणाम 15 मई को आएगा। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह दोनों ही लगातार कर्नाटक में अपने दौरे कर रहे हैं। जहां कांग्रेस कर्नाटक में एक बार फिर से सत्ता पर काबिज होना चाहेगी तो वहीं भाजपा अपने 5 साल के वनवास को खत्म करने की कोशिश करेगी।
इस विधानसभा चुनाव में भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री पद के दावेदार बीएस येदियुरप्पा शिकारीपुरा से टिकट दिया गया है।

कहार, कुम्हार और गोंड सहित अन्य 17 अति पिछड़ी जातियों को शामिल किया जाएगा SC/ST में।

नई दिल्ली : आरक्षण को लेकर अभी भी देश मे काफी आक्रोश देखा जा रहा है। देश मे दलित ही सबसे पिछड़े थे। जिन्हें आरक्षण मिला। और आज के समय मे बहुत से लोगो का विकाश भी हुआ। लेकिन इन दलितों से भी पीछे ये अति पिछड़ी जातियां है। जिनका उत्त्थान नही के बराबर है। अति पिछड़ी जातियों का आर्थिक और शैक्षिक विकास करने के लिए भारतीय जनता पार्टी जातिय समीकरणों को दुरस्त करने में लगी हुई है।
जल्द ही केंद्र सरकार प्रदेश की 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जातियों की सूची में शामिल किया जाएगा। इन अति पिछड़ी जातियों में निषाद, मल्लाह, केवट, कश्यप, भर, धीवर, बाथम, मछुआरा, प्रजापति, राजभर, कहार, कुम्हार, धीमर, मांझी, तुरहा और गौड़ इत्यादि शामिल है। एक अरसे से इन अति पिछड़ी जातियों की मांग रही है कि उन्हें एससी एसटी की सूची में शामिल किया जाए। लंबे इंताजर के बाद केंद्र की प्रदेश सरकार ने अब जाकर इनकी मांग को पूरा करने का विचार किया है। केंद्रीय नेतृत्व अति पिछड़ी जातियों की इस मांग से पूरी तरह सहमत है और उन्होंने जल्द ही इस पर विचार करने का फैसला भी सुनाया।
एससी एसटी वर्ग के साथ ओबीसी वालों को शामिल करने के लिए ऐसा किया जा रहा है।इससे उनका आर्थिक और शैक्षिक विकास होगा। साथ ही उन्हें एक समान दर्जा भी मिलेगा। आज भी ओबीसी वर्ग के इन 17 जातियों की आर्थिक और शैक्षिक स्थिति दलितों से भी खराब हो गयी है। न ही सरकारी नौकरी में उनका प्रतिनिधित्व है। और न ही वे समाज के बाकी क्षेत्रों में आगे बढ़ सके हैं। इसलिए सरकार की यह मंसा है। कि इन्हें भी आगे बढ़ने के लिए कुछ आरक्षण प्रदान किया जाय। ताकि इनका भी विकाश हो सके। लाइक और फॉलो बटन दबाकर कॉमेंन्ट बॉक्स में बताइये। कि के आप सरकार के इस निर्णय से सहमत है। कॉमेंन्ट करके बताए।

आरक्षण के विरोध में कल भारत बंद, क्या एक और हिंसा की आग में जलेगा देश?

जयपुर । 2 अप्रैल को हुए भारत बंद में जातीय हिंसा की आग में देश झुलस गया था। देश के कई राज्यों में जातीय संघर्ष की वजह से कई लोगों की जानें चली गई थीं।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा देश में लागू एससी एसटी एक्ट में किये गए बदलाव और उसमें केंद्र सरकार के द्वारा तब रूचि ना लिये जाने की वजह से कई जातीय संगठनों ने 2 अप्रैल को भारत बंद का आयोजन किया था।इस दिन बंद के दौरान कई हिंसक घटनाएं हुईं, जिसमें दर्जन भर लोगों की मौत हो गई थीं। इस मामले में अभी भी कई लोगों की गिरफ्तारी हो रही है और कानूनी काम जारी है।

लेकिन अभी बवाल ठंडा नहीं हुआ है। सोशल मीडिया पर चल रही खबरों और कई संगठनों के दावों पर गौर किया जाए तो कल यानि कि 10 अप्रैल को देश भर में आरक्षण के विरोध में देश-व्यापी बंद का आयोजन किया जाने वाला है।इस बंद में अभी कौन से संगठन शामिल होंगे, इसके पता अभी चल नहीं पाया है। लेकिन देश भर के कई राज्यों में प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना शुरु कर दिया है।

खबरों के मुताबिक 2 अप्रैल को हुई हिंसा और आरक्षण के खिलाफ स्वर्ण और ओबीसी समुदाय कल भारत बंद का आयोजन करने जा रहा है। ये खबर 2 अप्रैल को हुए दलितों द्वारा भारत बंद के बाद ही आनी शुरु हो गई थी।कल संभावित भारत बंद के मद्दनेज़र उत्तर प्रदेश प्रशासन ने पूरे राज्य में धारा 144 लोगू कर दी है। जबकि मध्य प्रदेश में स्कूलों को कल के लिए बंद कर दिया गया है और कई शहरों में इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया गया है।

दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायधीश राजिंदर सच्चर का निधन, मुसलमानों के लिए किया था ऐतिहासिक काम।

नई दिल्लीः मुसलमानों की स्थिति सुधारने के लिए बेहतरीन काम करने वाले दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायधीश राजिंदर सच्चर अब हमारे बीच नहीं है।
शुक्रवार को 94 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। वे काफी लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उन्हें हाल में ही एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया था । साल 1952 में वकालत से अपने करियर की शुरुआत करने वाले जस्टिस सच्चर ने मानवाधिकार के लिए काफी अच्छा काम किया था । 12 फरवरी 1970 को वे दिल्ली हाईकोर्ट के बने थे। दो साल काम करने के बाद उन्हें 5 जुलाई 1972 को दिल्ली हाई कोर्ट का न्यायधीश बनाया गया। इसके अलवा वे सिक्किम और राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस बनाए गए थे।
मुसलमानों की स्थिति पर दी थी रिपोर्ट
साल 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह ने दिल्ली हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस राजिंदर सच्चर की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी। यह समिति सच्चर कमेटी के नाम से मशहूर हुई थी। यह समिति देश में मुसलमानों की स्थिति जाने के लिए गठित हुई थी। राजिंदर सच्चर ने अपनी रिपोर्ट में यह खुलासा किया था कि देश में मुसलमानों की स्थिति अनुसूचित जाति-जनजाति से भी बदतर है। 403 पेज की इस रिपोर्ट को नवबंर 2006 में लोकसभा में भी पेश किया गया था।
जस्टिस ने की थी ये सिफारिशें
जस्ट‍िस राजि‍न्‍दर सच्‍चर की कमेटी ने देश के मुस्लिम समाज की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति का अध्ययन किया था। उन्होंने मुस्लिमों की भलाई के लिए केंद्र सरकार से 10 प्रमुख सिफारिशें की थीं।
1- मुस्लिम समुदाय की शैक्षणिक स्थिति को मजबूत करने के लिए राजि‍न्‍दर सच्‍चर ने 14 साल के बच्चों को मुफ्त में शिक्षा देने की बात कही थी। इसके अलावा उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाले मुस्लिम बच्चों के लिए स्कॉलरशिप देने और मदरसों का आधुनिकीकरण करने पर जोर दिया था।
2- मुस्लिम समुदाय की आर्थिक स्थिति सही करने के लिए उन्होंने केंद्र सरकार से बढ़े-लिखे मुस्लम बच्चों को रोजगार देने की सिफारिश की थी।
3- ग्रामीण अंचलों में मुस्लिम आबादी वाले इलाकों में सरकारी बैंक खोलने और उन्हें ऋण देकर राजगार के लिए प्रोत्साहित करने की भी रिफारिश की थी। मुस्लिम महिलाओं को रोजगार देने के लिए भी उन्होंने लघु उद्योगों को बढ़ावा देने की बात कही थी।
4- मुस्लिम परिवारों से आने वाले बच्चों के लिए उन्होंने देश भर में आईटीआई और पॉलि‍टेक्‍नि‍क संस्‍थान खोलने की भी रिफारिश की थी। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि इससे मुस्लिम आबादी वाले इलाकों में विकास होगा.
5- इसके अलावा पूर्व जस्टिस ने मुस्लिम वक्‍फ बोर्ड की संपत्‍ति‍यों को बेहतर उपयोग के लिए केंद्र सरकार से कार्य योजना बनाने की भी सिफारिश की थी।
6- मुस्लिम आबादी वाली बस्तियों और गरीबों की बुनियादी सुविधाओं के लिए बेहतर स्कूल, अच्छी स्वाथ्य सेवाएं और सरकारी स्कूल खोलने की भी सिफारिश की थी।
7- राजनीति में सामाजिक समीकरण को संतुलित करने के लिए मुस्लिम बहुल इलाकों की सीटों को आरक्षित किया जाए और इस सीट पर अन्य समुदाय के लोगों को चुनाव लड़ने नहीं दिया जाए।
8- मुस्लिम समाज के लोगों के लिए इक्‍वल अपॉर्च्युनि‍टी कमीशन, नेशनल डेटा बैंक असेसमेंट और मॉनि‍टरी अथॉरि‍टी का गठन की भी बात की गई थी।
9- मदरसों से पढ़कर निकले बच्चों की डिग्री को सरकारी नौकरियों के लिए मान्यता देने की सिफारिश की गई थी।
10-मुस्लिम वर्ग के लोगों के लिए सरकार विशेष तौर पर योजना बनाए और उसको कड़ाई से लागू करे।

गुरुवार, 19 अप्रैल 2018

अश्वनी चौबे के द्वारा राजेंद्र मिश्र कॉलेज परिसर में स्तिथ पोखर सम्बंधित को लेकर कुलपति को सौंपा पत्र।

गौरव बंटी : (न्यूज़ डेस्क) : सहरसा : आज तिवारी टोला के युवााओं ने BNMU मधेपुरा के कुलपति महोदय माननीय डा.अवध किशोर राय और BNMU  के फारूक़ अली  से छठ पूजा को लेकर के बात किये।
युवाओं का कहना है कि 100 सालों से हमारे पूर्वजों के द्वारा राजेंद्र मिश्र महाविद्यालय परिसर में स्थित पोखर में हमारे सभी ग्राम वासी बड़ी हर्षो उल्लास के साथ आस्था की महापर्व छठ पुजा मनाते आ रहे हैं । जब छठ पूजा की समय आती है तो हमारे सभी ग्राम वासियों को पूजा करने मे कठिनाई उत्पन्न होती हैं। क्योकि काॅलेज प्रशासन के द्वारा पोखर की सौन्दर्य में कोई भूमिका नही थी और नही है । आप वर्तमान में जाकर खुद देख सकते हैं पोखर की स्थिति क्या है । सिर्फ आश्वासन मिलता कि कॉलेज के द्वारा हरेक साल पोखर की मरम्मत कराया जाएगा।  डाॅ रेणु सिन्हा काॅलेज की प्राचार्या थी उसके बाद डॉ पि• सी• खां ने काॅलेज प्राचार्य और वर्तमान में है प्राचार्य डॉ• आर• बी• झा इन सभी प्राचार्य महोदयो से बार बार सभी आग्रह करता रहता है जो आप कम-से-कम पोखर की सौन्दर्य करण और पोखर के चारों ओर सीढ़ी बना दे। ताकी हम सभी ग्रामवासियों को लोक आस्था की महापर्व पर्व छठ पूजा मनाने में  कोई समस्या उत्पन्न न हो परंतु ऐसा अभी तक नही हो पाया । इस सारी समस्याओं को माननीय कुलपति महोदय को अवगत कराते हुए एक मांगपत्र कूलपति महोदय सर को सौंपा गया ।
कुलपति महोदय के द्वारा आश्वासन मिली बहुत जल्द पोखर का सौन्दर्य और पोखर के चारों ओर सीढ़ी बनाएं जाएगी ।जिनमें सोनू तिवारी,विकास कुमार,मोनू तिवारी,बुलबुल तिवारी,सावन तिवारी,सोहन कुमार,दीपक कुमार,आशीष झा,सुमन कश्यप,आशीष कुमार,जितेंद्र कुमार,सुशांत,संतोष,आदि युवा शामिल रहे।
आपकी आवाज,आपकी ताकत।

सोमवार, 16 अप्रैल 2018

अभी-अभी : दंगा कर रहे दलितों को सुप्रीम कोर्ट का एक और झटका, कहा- जाओ अभी नहीं करेंगे सुनवाई।

New Delhi : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (2 अप्रैल) को एससी/ एसटी अधिनियम में संरक्षण के उपायों के फैसले पर रोक लगाने और इस पर पुनर्विचार की एक याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार किया है। करीब 150 समूहों से मिलकर बने एससी/एसटी संगठनों के अखिल भारतीय संघ ने आज (सोमवार, 2 अप्रैल) बड़े पैमाने पर हुई हिंसा का संदर्भ देते हुए अविलंब सुनवाई की मांग की। एससी/एसटी संगठनों द्वारा अविलंब सुनवाई की मांग अस्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले पर सुनवाई उचित समय पर होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च के अपने फैसले में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के कुछ प्रावधानों को नरम बनाया था, ताकि अपना कर्तव्य निभा रहे ईमानदार अधिकारियों को कानून के तहत झूठे मुकदमों में फंसा कर ब्लैकमेल किये जाने से रोका जा सके। फैसले की दलितों और विपक्ष ने कटु आलोचना की है। उनका कहना है कि कानून को कमजोर करने से दलितों के खिलाफ भेदभाव और अपराध बढ़ जाएंगे।
वहीं दूसरी ओर अनुसूचित जाति/जनजाति (एससी/एसटी) अत्याचार रोकथाम अधिनियम को कमजोर करने को लेकर आपत्ति जताते हुए विभिन्न दलित संगठनों के कार्यकर्ताओं ने पंजाब व हरियाणा में विरोध प्रदर्शन किया। तलवारें, लाठियां, बेसबॉल बैट व झंडे लिए सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने जालंधर, अमृतसर व बठिंडा में दुकानों व अन्य प्रतिष्ठानों को जबर्दस्ती बंद करा दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने सोमवार (2 अप्रैल) सुबह अमृतसर जिले में एक ट्रेन को रोकने की कोशिश की, लेकिन रेलवे अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद उन्होंने ट्रेन को जाने दिया।

कानून को कमजोर बनाये जाने के विरोध में कड़ी सुरक्षा के बीच दलितों ने पंजाब के जालंधर, होशियारपुर, रोपड़, बठिंडा, अमृतसर और फिरोजपुर में प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन के अंदर भी दाखिल हो गए। उन्होंने ट्रैक पर पुतले भी जलाए। कुछ राजमार्गो व सड़कों को भी जाम कर दिया गया है, जिसके कारण चंडीगढ़ व आसपास के इलाकों में आवागमन गंभीर रूप से प्रभावित हुआ।

अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) अधिनियम पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के विरोध में सोमवार (2 अप्रैल) को आहूत भारत बंद का असर राज्य के कई हिस्सों में देखने को मिला है। पूर्वांचल के आजमगढ़ जिले और पश्चिमी उप्र में कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने बसों में आगजनी व तोड़फोड़ की। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठियां भांजनी पड़ी। एससी-एसटी अधिनियम में परिवर्तन के विरोध में सोमवार (2 अप्रैल) को आजमगढ़ में प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए। इस दौरान जिले के सगड़ी तहसील परिसर के बाहर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया। वहीं, अजमतगढ़ में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सड़क पर उतर कर दुकानें बंद कराई और सड़कों पर जाम लगा दिया।

'संविधान से छेड़छाड़ नहीं चलेगी' के नारे :
आजमगढ़ के अजमतगढ़ में बड़ी संख्या में दलित समुदाय के लोगों ने सोमवार सुबह 10 बजे जुलूस निकाला और बाजार बंद कराने लगे। प्रदर्शनकारियों ने यहां तोड़फोड़ भी की। भीम आर्मी और भारत मुक्ति मोर्चा के 2000 से अधिक सदस्य 'संविधान से छेड़छाड़ नहीं चलेगी, नहीं चलेगी' के नारे लगा रहे थे। इन लोगों ने मुख्य मार्ग पर नारेबाजी करते हुए जाम लगा दिया। पुलिस ने उन्हें हटाना शुरू किया तो विरोध में प्रदर्शनकारियों ने पथराव शुरू कर दिया। पुलिस ने बल प्रयोग कर प्रदर्शनकारियों को शांत कराया।
मेरठ में पुलिस पर हमला :
पश्चिमी उप्र में मेरठ शहर के कंकरखेड़ा क्षेत्र में सैकड़ों युवक हाथों में लाठी-डंडे और हथियार लेकर प्रदर्शन करते हुए सड़क पर उतर आए और उन्होंने जमकर बवाल मचाया। इस दौरान कुछ उग्र प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर हमला कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से नाराज दलित विद्यार्थियों ने मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया। विद्यार्थियों ने परिसर में तोड़फोड़ की। दलितों ने तेजगढ़ी चौराहे पर कब्जा कर चक्का जाम कर दिया। इसके साथ ही कई जगहों पर बसों को भी जलाने की खबर है। पुलिस ने लोगों को दिल्ली से देहरादून की ओर न जाने की सलाह दी है।

बाबा साहब आंबेडकर की मूर्ति स्थापना को पुलिस ने रोका।

जौनपुर. बाबा साहेब आंबेडकर की जयंती को लेकर शनविवार को जहां लोगों में खूब उत्साह दिखा तो वहीं जयंती बीतने के 24 घंटे के भीतर ही जौनपुर जिले के महराजगंज में पुलिस ने बाबा साहब की मूर्ति स्थापना पर रोक लगा दिया।
जिसके बाद से ही पूरे लोगों में काफी नाराजगी देखी जा रही है।
बतादें कि महराजगंज थाना क्षेत्र के चांदपुर गांव में अनिल गौतम के नेतृत्व मे ग्रामीणों द्वारा भीमराम आंबेडकर की प्रतिमा लगाई जा रही थी। जिस पर जगन्नाथ शर्मा ने आपत्ति जताई थी कि यह मेरे पट्टे की जमीन के बगल में स्थित है। ऐसे मे प्रतिमा की स्थापना महाराजगंज थाना अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने यह करते हुए रोक दिया कि परमिशन के बाद ही प्रतिमा लगनी चाहिए।
लोगों ने बताया कि चांदपुर गांव में अनिल गौतम एवं जिला पंचायत सदस्य रण बहादुर यादव, सत्यप्रकाश, रमेशचन्द्र, राजेश, सुरेश चंद्र, शनि गौतम आदि ग्रामीण आर्थिक सहयोग से एक बंजर भूमि पर भीमराम अंबेडकर की प्रतिमा स्थापना हेतु चबूतरा का निर्माण कर रहे थे।
इसी दौरान गांव के ही जगन्नाथ शर्मा ने यह कहते हुए इस निर्माण कार्य का विरोध कर दिया कि प्रतिमा की स्थापना हमारे पट्टे की जमीन में बगैर परमिशन किया जा रहा है। इस बात सूचना जैसे ही पुलिस को लगी मौके पर पहुंची यूपी- 100 की पुलिस एवं थानाध्यक्ष महाराजगंज भानु प्रताप सिंह ने मूर्ति स्थापना के काम को ठप करा दिया। पुलिस का कहना था कि प्रतिमा स्थापना बगैर नापजोख एवं सरकारी परमिशन के नहीं हो सकती। इस संबंध में एसओ महाराजगंज भानु प्रताप सिंह का कहना है नाप जोख एवं प्रशासन की अनुमति के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में ही यहां पर प्रतिमा स्थापित हो सकती है। ऐसे में ग्रामीणो से प्रतिमा की स्थापना नहीं करने को कहा गया है। लेकिन इस बात को लेकर मूर्ति लगवाने का प्रयास कर रहे लोगों में काफी निराशा देखी जा रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने लिया ऐसा फैसला कि बलात्कारियों में छा गया खौफ।

TODAY JAGRAN : भारत में लगभग हर 20 मिनट में 1 बलात्कार होता है ।
इसकी वजह से सरकार को शर्मिन्दगी भी उठानी पड़ती है । लेकिन अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ऐसा निर्णय लिया है जिससे बलात्कारियों में खौफ छाना लाजिमी है ।
अभी तक पोस्को ऐक्ट में अधिकतम आजीवन कारावास होता है । केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री ने कहा है कि उनका मंत्रालय पोस्को ऐक्ट में संशोधन करने की तैयारी कर रहा है । जिससे इस संशोधन के बाद 12 वर्ष से कम उम्र की बच्ची के साथ बलात्कार करने वाले को मौत की सजा दिये जाने का प्रावधान होगा ।
आपको बता दें कि अगर यह प्रस्ताव पारित हो जाता है तब भी यह केवल उन पर लागू होगा जो कानून बनने के बाद की घटनाएं होंगी ।

रविवार, 15 अप्रैल 2018

रामविलास पासवान बोले- गरीब सवर्णों को भी मिलना चाहिए आरक्षण का फायदा।

रोहन यादव : पटना : एलजेपी प्रमुख और केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि हम चाहते हैं कि गरीब सवर्णो को भी 10 या 12 प्रतिशत आरक्षण मिले। न्यायपालिका में आरक्षण जरूरी है। राजद में हिम्मत है तो तेजस्वी यादव को छोड़कर जीतन राम मांझी को सीएम उम्मीदवार घोषित करे। यूपी में सीएम रहते मायावती ने एससी-एसटी एक्ट को शिथिल करने का जो आदेश निकाला था, उसके लिए उन्हें दलितों से माफी मांगनी चाहिए। हमारी सरकार सांप्रदायिकता को बर्दाश्त करने वाली नहीं है। 

दलित सेना के राष्ट्रीय सम्मेलन में शनिवार को पासवान ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तो दलितों के लिए जितना कर दिया उतना सात जन्म में कोई नहीं कर सकता। मांझी को कहां से कहां तक पहुंचा दिया। कांग्रेस बताये कि अपने शासनकाल में उसने दलितों के लिए क्या किया। एससीएसटी एक्ट भी वीपी सिंह की देन है। नरेन्द्र मोदी ने उसे मजबूत किया। पहले 22 अत्याचार उसके तहत आते थे, मोदी ने बढ़ाकर 47 अत्याचारों को शामिल किया। बिहार में निचली अदालतों में नीतीश कुमार ने आरक्षण की व्यवस्था कर दी है। लेकिन जब तक हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में यह व्यवस्था नहीं होगी। दलितों के हक के खिलाफ फैसले आते रहेंगे। 

केन्द्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि आरक्षण पर बहस एक साजिश के तहत की जा रही है। ऐसा करने वाले चाहते हैं कि पिछड़े और दलित इसी में उलझ कर रह जाएं। लोग कहने लगे हैं कि आरक्षण छीन लेंगे। हम कहते हैं कि अभी और लेंगे। उन्होंने कहा कि चाय बेचने वाला पीएम हो सकता है लेकिन वर्तमान व्यवस्था में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जज नहीं हो सकता। हम कोर्ट से आग्रह कर रहे हैं कि ऐसी व्यवस्था करे कि दलित, पिछड़े और गरीब भी वहां पहुंचे। राष्ट्रपति ने भी चिंता जताते हुए कहा है कि न्यायपालिका में महिलाएं 25 प्रतिशत भी नहीं हैं। दलित तो शायद ही अब तक कोई हुआ हो।

लोजपा संसदीय बोर्ड के चेयरमैन चिराग पासवान ने कहा कि आजादी के इतने दिनों बाद भी दलितों को हक के लिए संघर्ष की जरूरत पड़ती है तो यह तय करना होगा कि इसके पीछे कौन हैं। अब तक देश पर शासन करने वालों ने क्या किया। मेरे रहते आरक्षण पर आंच भी नहीं आ सकती। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने आंबेडकर से जुड़े सभी स्थलों को स्मारक घोषित कर उनका विकास किया है। 

एक मई को फिर होगा ‘भारत बंद’, SC/ST ACT. में बदलाव के खिलाफ दलित करेंगे प्रदर्शन।

TODAY JAGRAN : एस/एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ देशभर के दलित 1 मई को राष्ट्रीय प्रतिरोध दिवस मनाएंगे। इसके लिए दलित संगठनों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील की है। दलित मूवमेंट फॉर जस्टिस (NDMJ) के महासचिव और एस/एसटी एक्ट (अत्याचार से संरक्षण) को सख्त बनाने और इसका सख्ती से पालन करवाने के लिए बने नेशनल कोअलिशन के राष्ट्रीय संयोजक डॉक्टर वीए रमेन नाथन ने कहा कि नेशनल कोअलिशन एक मई को सभी जिला और प्रदेश मुख्यालयों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का फैसला किया है।
नाथन ने कहा कि 1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस भी मनाया जाता है। इस दिन को पूरी दुनिया में कामगरों के अधिकारों के दिन के रूप में मनाया जाता है। नाथन ने कहा कि इसीलिए इस दिन का चुनाव किया गया है। नाथन ने कहा, 'भारत के मजदूर वर्ग के ज्यादातर लोग अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से आते हैं। हमें दलितों, आदिवासियों, औरतों और बच्चों के मानवाधिकारों की दिशा में अभी बहुत लंबा सफर तय करना है। वे अब भी हिंसा और भेदभाव झेल रहे हैं।'
नाथन ने कहा, "हम आपसे अपील करते हैं कि एससी-एसटी एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में एक मई को राष्ट्रीय प्रतिरोध दिवस के रूप में मनाएं।" उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ताओं, एम्प्लॉयी एसोसिएशनों, ट्रेड यूनियनों, मानवाधिकार के लिए काम करने वाली संस्थाओं, महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्थाओं से सहयोग मांगा है। उन्होंने कहा कि इस दिन देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए जाएंगे।नेशनल कोअलिशन ने सरकार के सामने 12 प्रमुख मांगें रखी हैं। उनकी मांगों में एक मांग यह भी है कि भारत सरकार यह सुनिश्चित करे कि न ही न्यायपालिका और न ही संसद के किसी फैसले से एससी-एसटी एक्ट (अत्याचार से संरक्षण) की स्थिति वही रहेगी जो सुप्रीम कोर्ट के 20 मार्च के फैसेल से पहले थी। इससे पहले दलितों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में 2 अप्रैल को भारत बंद का आह्वान किया था।

लालू परिवार पर जमकर बरसे नीतीश, कहा- 15 साल बिहार पर राज किया, तब नहीं आई दलितों की याद।

आकाश यादव : पटना: लोजपा दलित सेना के बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर जयंती समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लालू परिवार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने आरक्षण को लेकर कहा कि किसी में दम नहीं कि आरक्षण खत्म कर दे। इसके नाम पर हौवा खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने नाम लिये बगैर लालू प्रसाद को कटघरे में खड़ा किया। 

उन्होंने कहा कि 15 वर्षों तक पति-पत्नी ने शासन किया। दलितों के लिए क्या किया? तब दलितों की याद नहीं आई। लालू प्रसाद ने पंचायतों में आरक्षण क्यों नहीं दिया? आज आरक्षण के हिमायती बन रहे हैं। हमारी सरकार बनी तो हमने पंचायतों में आरक्षण का प्रावधान किया। वर्ष 2005-06 में दलित छात्रों पर महज 32 करोड़ खर्च होते थे, आज 428 करोड़ खर्च हो रहे। एससी कल्याण विभाग का बजट मात्र 40 करोड़ का था और आज 1550 करोड़ का है। 
इसके अलावा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ऐलान किया कि महादलितों को मिलने वाली तमाम सुविधाएं और उनकी योजनाओं का लाभ अब सारे दलितों को मिलेगा। अब इसकी परिधि से कोई बाहर नहीं होगा। अबतक पासवान समाज के लोग इस लाभ से वंचित थे। लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष पशुपति पारस ने पासवान वर्ग के लिए महादलित वाली सुविधाएं मांगी थीं। 
सीएम ने चौकीदारों व दफादारों को भी सौगात दी। उन्होंने कहा कि वे रिटायरमेंट के 4 माह पहले लिखकर देंगे तो उनके परिजन को उनकी जगह नियुक्त किया जाएगा। सीएम ने उनके पोशाक भत्ते को भी बढ़ाने की घोषणा की। अब चौकीदारों को हर साल 3 हजार की जगह 4 हजार और दफादारों को 8 हजार रुपए मिलेंगे। सीएम ने एससी-एसटी-पिछड़े-अति पिछड़े-अल्पसंख्यक छात्रावास में रहनेवालों को बीपीएल दर पर अनाज देने व उन्हें विशेष आर्थिक सहायता देने का एेलान किया। यह छात्रवृत्ति से अलग होगा।

नीतीश पर तेजस्वी खूब बोलते हैं हमला, मगर खुद दागी MLC उम्मीदवार का कर रहे समर्थन।

टुडे जागरण: नीतीश कुमार के नए मंत्रिमंडल में 75 प्रतिशत मंत्री दागी हैं और उनके मंत्रियों के नाम भी पानामा पेपर्स में शामिल है। इस मामले में नीतीश क्यों चुप हैं? हम इसकी जांच की मांग करेंगे।’ पिछले साल अगस्त के महीने में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला करते हुए तेजस्वी यादव ने ये सवाल किया था। तेजस्वी इस बात से खफा थें कि नीतीश ने महागठबंधन छोड़ बीजेपी के साथ हाथ मिला लिया। तेजस्वी यादव ने कहा था कि नीतीश के नए मंत्रिमंडल में 75 प्रतिशत दागी हैं।   

अब आप सोच रहे होंगे कि हम फ्लैशबैक में क्यों गए। दरअसल हमेशा नीतीश से सवाल पूछने वाले तेजस्वी यादव की पार्टी ने किया ही कुछ ऐसा है। एनडीए को कमजोर करने के लिए राजद ने जीतन राम मांझी से डील किया। जब मांझी एनडीए छोड़कर महागठंधन में शामिल हुए थे तब यह बात जगजाहिर नहीं हुई थी कि आखिर राजद-हम के बीच क्या डील हुई। मगर अब ये साफ हो गया है कि राजद ने मांझी के बेटे को एमएलसी की सीट देने का सौदा किया था। जब दो दलों के नेता हाथ मिलाते हैं तो इसे सिर्फ राजनीति फायदे के रूप में देखना चाहिए। जनता या जनता से जुड़े मुद्दों की आड़ में ऐसा किया जाता है। सिर्फ लोगों को भ्रमित किया जाता है।  

तेजस्वी यादव ने डील करते समय ये नहीं देखा कि जिस मांझी के बेटे को वह एमएलसी बनाने का वादा कर चुके हैं, उसके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्यूलर) के एमएलसी उम्मीदवार और जीतन राम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन को राजद द्वारा समर्थन प्राप्त है। संतोष के खिलाफ बोधगया में आइपीसी की धारोओं के तहत केस दर्ज है। इतना ही नहीं औरंगाबद के एक मामले में कोर्ट संज्ञान भी ले चुका है। संतोष कुमार को हथियार रखने का भी शौक है। उनके पास एक राइफल और एक रिवॉल्वर भी है। तेजस्वी यादव ने जिस दागी नेताओं को मुद्दा बनाकर नीतीश कुमार पर हमला बोला था। आज वह उसी राह पर चल रहे हैं। उनकी पार्टी एक दागी एमएलसी उम्मीदवार को समर्थन दे रही है।

राज्य में पहली बार तैयार होने जा रहा साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर, फॉरेंसिक लैब भी होगी यहां।

Patna : राज्य में साइबर अपराध के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। पिछले पांच साल में साइबर अपराध से जुड़े मामले में 533 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गयी है। इसमें औसतन सालाना 106 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। अन्य अपराधों की तुलना में इसकी बढ़ोतरी सबसे ज्यादा होने से यह आकलन लगाया जाने लगा है कि आने वाले कुछ साल में यहीं सबसे मुख्य अपराध बन जायेगा। 
 
साइबर अपराध की इस गंभीरता के मद्देनजर राज्य के सभी जिलों में करीब 74 साइबर क्राइम यूनिट (सीसीयू) का गठन होने जा रहा और इन सभी यूनिटों को जोड़ कर समेकित रूप से राज्य स्तरीय एक साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर (4-सी) का गठन होने जा रहा है। राज्य सरकार के स्तर पर इसकी कवायद तेज कर दी गयी है। 
 
आर्थिक अपराध इकाई (इओयू) के अधीन इसका पूरी तरह से नियंत्रण होगा और यह वर्तमान में मौजूद ईओयू के कार्यालय के बगल में ही बनेगा। इस राज्य स्तरीय साइबर सेंटर में महिला और बच्चों के प्रति होने वाले सभी तरह के साइबर अपराध से जुड़े मामलों की तफ्तीश करने के लिए अलग से एक सेंटर स्थापित किया जायेगा। 
यहां राज्य के सभी स्थानों या जिलों में दर्ज साइबर अपराध से जुड़े मामलों की मॉनीटरिंग की जायेगी और जिस जिला में इससे जुड़े सभी संगीन या जटिल मामलों का समाधान करने में एक्सपर्ट लोगों की सलाह भी प्रदान की जायेगी। इसमें चीफ प्रोग्रामर का भी पद होगा, जो साइबर अपराध से जुड़े तमाम गुर बातों की जानकारी देंगे। यहां जिला स्तर पर गठित होने वाले साइबर क्राइम यूनिट समेत अन्य स्तर के कर्मियों को ट्रेनिंग दी जायेगी। 
 
इस विशेष प्रोजेक्ट के लिए पैसे की स्वीकृति हो गयी है। केंद्र से भी पैसा आ रहा है। इसका अपना भवन तैयार होने में समय लगेगा। तब तक साइबर क्राइम कंट्रोल यूनिट की शुरुआत ईओयू के निर्माणाधीन भवन में हो जायेगी, जिसका निर्माण कार्य जून तक पूरा होने की पूरी संभावना है। सेंटर के लिए सामानों की खरीद भी जून के पहले तक कर ली जायेगी। तीन से चार महीने में सेंटर पूरी तरह से काम करने लगेगा। 
 इस सेंटर में एक साइबर क्राइम फॉरेंसिक लैब भी होगी, जिसमें साइबर अपराध के अनुसंधान के तरीकों पर रिसर्च भी होगा और कुछ रोचक या जटिल अपराध को केस स्टडी के रूप में रखा जायेगा। यहां ई-लाइब्रेरी भी रहेगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय के साइबर क्राइम प्रोटेक्शन यूनिट की तरफ से इसे स्थापित किया जा रहा है। 

देश को खतरे में बताते हुए आजादी के बाद पहली बार पटना की सड़कों पर उतरेंगे मुस्लमान।

पटना : आजादी के बाद शायद ऐसा पहली बार होने जा रहा है कि जब भारतीय मुसलमान 'इस्लाम और राष्ट्र को खतरे' में बताते हुए सड़कों पर उतरेंगे और नारे बुलंद करेंगे। बिहार की राजधानी पटना में इमारत शरिया और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) एक साथ मिलकर 15 अप्रैल को पटना के गांधी मैदान में 'दीन (धर्म) बचाओ, देश बचाओ' नाम से रैली करेंगे। 

हुत सारे मौलवी और समुदाय के नेता साफतौर पर यह संदेश देने वाले हैं कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार में न ही देश सुरक्षित है और न ही मुस्लिमों का धर्म। इससे पहले तीन तलाक को लेकर देशभर में प्रदर्शन करने के बाद एआईएमपीएलबी और इमारत शरिया देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति, संविधान और इस्लाम पर खतरे के मुद्दे उठाने के लिए तैयार हैं। इमारत शरिया 1921 में बिहार, झारखंड, ओडिशा के मुस्लिमों को शरिया के तहत आने वाले मुद्दों को समझाने के लिए बनाई गई थी। 

एआईएमपीएलबी के महासचिव मौलानी वली रहमानी ने इस बारे में कहा, 'हमने चार साल इंतजार किया, यह सोचकर कि बीजेपी संविधान के तहत देश चलाना सीख लेगी। हमारे पर्सनल लॉ पर हमला हो रहा है। हमें अपने देशवासियों को बताना पड़ रहा है कि देश के साथ-साथ इस्लाम पर भी खतरा है।' 
रैली में अधिक से अधिक मुस्लिमों को शामिल करने के लिए इमारत शरिया, एआईएमपीएलबी, मदरसे और मस्जिदें जुट गई हैं। आयोजकों को कम से कम तीन लाख लोगों के आने की उम्मीद है। इमारत शरिया ने रैली को किसी विपक्षी दल का समर्थन प्राप्त होने की बात से इनकार किया है।  

नाबालिग लड़की को पहले किया अगवा, फिर ट्रक में चार लोगों ने किया गैंगरेप।

Patna : बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी थाना क्षेत्र से एक नाबालिग लड़की को चार युवकों ने अगवा कर लिया। फिर उससे वैशाली जिले के गरौल एरिया में लेकर आए और ट्रक के केबिन में उसके साथ गैंगरेप किया। जब लड़की दर्द से चिल्लाने लगी तो हैवानों ने म्यूजिक सिस्टम का साउंड तेज कर दिया। जिससे लड़की की आवाज बाहर नहीं जा सके।
घर से जा रही थी दुकान
घटना के बारे में बताया जा रहा है कि नौवी में पढ़ाई करने वाली छात्रा अपने घर से राशन का समान लेने के लिए बाहर दुकान जा रही थी। इस दौरान सड़क किनारे एक ऑटो में चार युवक बैठे थे। चारों ने उससे पकड़ लिया और ऑटो में बैठाकर भाग निकले। जिसके बाद गैंगरेप किया।
दो को पुलिस ने किया गिरफ्तार
दो आरोपी बाइक पर बैठाकर झिटकी चौर से गोरौल की ओर लड़की को लेकर आ रहे थे। लड़की को देख पुलिस को शक हो गया। एक बाइक पर दो युवक बैठे थे और बीच में लड़की को बैठाया था। दो युवक दूसरे बाइक से आ रहे थे। इस दौरान पुलिस ने दो युवकों को पकड़ लिया। बाकी दो युवक फरार हो गए। जब पुलिस ने पूछताछ किया तो घटना की जानकारी मिली। जिसके बाद सदर हॉस्पिटल में मेडिकल कराया गया।

नीतीश कुमार विप चुनाव के लिए कल करेंगे नामांकन, एक बार फिर MLC बनना तय ।

Today Jagran : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विधान परिषद चुनाव में सोमवार को नामांकन करेंगे।
इधर, बिहार विधान परिषद की 11 सीटों पर हो रहे चुनाव में सत्ताधारी दल जदयू ने शनिवार देर शाम तक अपने उम्मीदवार तय नहीं किए। इसको लेकर कयासों का बाजार गर्म है। मुख्यमंत्री का तो बिहार विधान परिषद में एकबार फिर जाना तय है, लेकिन इसकी शेष सीटों पर दर्जनों नाम राजनीतिक हलके में उछल रहे हैं। दावेदारों की सक्रियता भी तेज है।जदयू के आम्बेडकर जयंती समारोह में भी एक वाकए को लेकर यह चर्चा चली। हुआ यह कि हाल ही में जदयू में वापस लौटे पूर्व मंत्री नरेन्द्र सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से कार्यक्रम के दौरान मंच पर कुछ बात की। उनकी बात कुछ मीडियाकर्मी और अगली कतार में बैठे नेताओं तक भी पहुंची। बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने नरेन्द्र सिंह को बशिष्ठ नारायण सिंह की ओर इंगित किया। हालांकि कार्यक्रम के बाद नरेन्द्र सिंह ने इसपर सफाई दी। कहा कि उन्होंने नीतीश जी से कहा कि वे टिकट लेने समारोह में नहीं आए हैं। पार्टी को लेकर कुछ सुझाव हैं उनके। उनका इस्तेमाल जदयू करे। इसपर सीएम ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष से बात कर लीजिए।उधर, बशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि मीडिया के लोग उल्टा समझ गये। नरेन्द्र भाई ने टिकट की मांग नहीं की है। उन्होंने कहा कि यह सही है कि नीतीश जी के पास जो भी टिकट मांगने जाता है, वे उसे मेरे पास भेज देते हैं। सीएम सबको कहते रहे हैं कि वे खुद उम्मीदवार हैं और प्रत्याशी तय करना तथा सिम्बल देना बशिष्ठ नारायण सिंह का जिम्मा है। दूसरी तरफ पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जदयू अपने उम्मीदवारों की घोषणा रविवार को करेगा।

शनिवार, 14 अप्रैल 2018

बड़ी खबर: मोदी का बायन-अब नहीं मिलेगा (SC,ST,OBC )को आरक्षण! New Reservation full detail.

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर दलित विरोधी होने का तमगा खुद उनकी ही पार्टी के सदस्य लगा रहे हैं.
एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केंद्र सरकार पर लगातार कांग्रेस की ओर से दलित विरोधी होने के आरोप लग रहे हैं, और इसी संदर्भ में लगातार बीजेपी के भी दलित सांसद पीएम मोदी को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. बीजेपी के ही कुछ सांसद केंद्र सरकार पर दलितों की अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं. हैरान करने वाली बात है कि जिन नेताओं ने अभी तक चिट्ठी लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की है, वे सभी पहले दूसरी पार्टियों में थे, और ये सभी 2014 या उसके कुछ समय पहले ही बीजेपी का दामन थामा था.
देश में आरक्षण खत्म करने की मांग को लेकर आरक्षण मुक्त भारत संगठन के पदाधिकारियों ने मंगलवार को सचिवालय पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन करने के बाद उन्होंने तहसीलदार दर्शन ¨सह के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा।
प्रदर्शन कर रहे आशु कुमार, यशपाल शर्मा, नंदू राणा, साहिल, गौरव साहनी ने कहा कि आरक्षण के कारण देश का बंटवारा हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट में जो संशोधन किया है, जनरल ओबीसी समाज उसका पूरी तरह से समर्थन करता है। उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की है कि इसी तरह आरक्षण को भी समाप्त किया जाए।
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